ए मसीहा तेरा करुणा कितना महान है
तेरी महिमा गाने को दिल मेरा मचलता है
पापों के दलदल से तूने मुझे छुड़ाया है
अपनी जान दे कर सूली पर तूने मुझे बचाया है
तेरी जय जयकार हो, तेरी स्तुति सदा की हो
आया हूँ दर पर तेरे, मंज़िल मुझे बता दे मेरी
जबसे पाया है प्यार तेरा, खुशी से भर गाया दिल मेरा
अपना सलीब उठाकर, अपना बनाया तूने हमें
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