जब से तो मिल गया है मसीह नासरी और ख़्वाहिश नई कुछ पाने की, कोई पागल कहे जा दीवानी कहे हमे परवाह नई हैं ज़माने की
१. लोग जितने भी ज़िंदगी मैं आते रहे करके बाते वह दिल को दुखाते रहे। तेरा सुन के कलाम मिला दिल को आराम अब फ़िकर नई किसे ताने की। जब से तू मिल गया हैं मसीह नासरी और ख़्वाहिश नई कुछ पाने की
२. तेरे वचनों से ज़िंदगी नई मिल गई, मुरझायी कल्ली फिर से खिल गई, अब दुगी गवाही मैं खुल के तेरी, ना जरूरत हैं कुछ भी शिपाने की
३. मैं दीवानी तेरी नासरी हो गई तेरी प्यारी सी बातो मैं हूँ खो गई, अब जाए ज़माना मुझे छोड़कर कर नहीं फ़िकर किसे की भी जाने की कोई पागल कहे जा दीवानी कहे। हमे परवाह नई हैं ज़माने की
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