आराधना करता हूं ,
युगान युग के राजा की ।
स्तुति मैं , करता हू
महिमा, से मंडित, प्रभु की ।
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अपार तेरी, दया के कारण
भवन मे, मैं तेरे आता हू ।
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सरको झुकाकर, संतों के साथ ,
सजदा मैं तुझको करता हू
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आराधना करता हूं ,
युगान युग के राजा की ।
स्तुति मैं , करता हू
महिमा, से मंडित, प्रभु की ।
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जीवन से उत्तम , तेरी है करुणा
हाथोको उठाकर तुझे धन्य कहूं ।
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दंडवत करते, दूतों के साथ,
ऊंचे स्वर मे गाता हूं.......
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आराधना करता हूं ,
युगान युग के राजा की ।
स्तुति मैं , करता हू
महिमा, से मंडित, प्रभु की ।
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