मुबारक है वो आदमी
जो पाप के रास्ते पे नहीं चलता है
रुकता नहीं पापियों के रास्ते में कहीं
जिनको नफ़रत है खुदा से, उनकी महफ़िल में ना जाए
जिनको शरीयत में खुदा की ही मज़ा मिलता है
वो उस दरख़्त की मानिंद
जो है पानी के किनारे
अपने मौसम से फल आए
रहे पत्ते हरे-भरे-2
सो वो जो कुछ भी है करता, वो उसे फलता है।
सूखे तिनके की तरह जिस्म ये उड़ जाएगा
उसके दरबार में पापी न जगह पाएगा-2
कि खुदावंद जो है, सादिकों से मिलता है।
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