भर दे, भर दे, मुझे भर दे…
पाक रूह, पाक रूह,
मुझे अपने मस्साह से भर दे।
पाक रूह, पाक रूह,
मुझे अपने फलों से भर दे।
मुझे भर दे, भर दे, मुझे भर दे।
प्रेम, आनंद, शांति,
धैर्य, कृपा, भलाई,
विश्वास, नम्रता, और संयम।
पाक रूह से भर जाएँ,
आत्मा के फल लाएँ।
भर दे, भर दे, मुझे भर दे…
पाक रूह, पाक रूह,
मुझे अपने मस्साह से भर दे।
पाक रूह, पाक रूह,
मुझे अपने फलों से भर दे।
रूह के सबब से ज़िंदा हुए हैं,
रूह के मुताबिक चलते रहें।
उसके वचन पे अमल करें, और
मन जो चाहे, वह ना करें।
नसीहत रूह की मानें,
मसीह को अव्वल जानें।
ख़्वाहिशों को अपनी
क्रूस पे रखें।
रूह के कामों में नहीं
होती कभी बुराई।
जैसे मसीह ने की है मोहब्बत,
और खुद को क़ुर्बान किया।
उसकी तरह हम, बनते जाएँ,
यह उसने पैग़ाम दिया।
कहीं धोखा ना खाना,
गुनाहों में ना आना।
खो ना जाना दुनिया की राहों में।
अंधेरा था पहले, नई रौशनी आई।
प्रेम, आनंद, शांति,
धैर्य, कृपा, भलाई।
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