तेरी शीरींन आवाज़
मैं सुनता हूँ खुदा
बुलाती पास उस चश्मे के
सलीब से जो बहा
आता हूँ मसीह, आता तेरे पास
धो के साफ़ कर चश्मे से
जो बहता क्रूस से ख़ास
आता कमज़ोर लाचार
देख मेरी हालत को
नज़ाकत से कर पाक और साफ़
कि एक भी दाग ना हो
मसीह तू बक्शता है
कामिल पियार ईमान
कामिल उम्मीद और चैन आराम
ज़मींन पर और आसमान
तहसीन कफ़्फ़ारे को
तहसीन मुफ्त फज़ल को
तहसीन मसीह की बक्शीश को
अब मिल के सब कहो
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