अंधकार से ज्योति में,
यीशु ने है बुलाया
कार्य को उसके ही,
दिखलाने है बुलाया
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कैसा है यह सौभाग्य!,
कैसा है अनोखा प्यार!
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तेरी ज्योति मैंने जो पाई है,
इसलिए मैं तेरे संग चलूँगा
ज्योति मुझे तू ने ठहरायी है
जहाँ भी हूँ मैं तो चमकूँगा,
जीऊँगा यीशु .....
पाप की गन्दगी से,
मुझे है छुड़ाया
गले लगा कर ही,
मुझे है अपनाया
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कैसी है यह फिरौती!
कैसा है अनोखा प्यार!
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तेरी ज्योति मैंने जो पाई है,
इसलिए मैं तेरे संग चलूँगा
ज्योति मुझे तू ने ठहरायी है
जहाँ भी हूँ मैं तो चमकूँगा,
जीऊँगा यीशु .....
पवित्र बने रहने को ही ,
मुझे है ठहराया
तुझे महिमा देने को ही ,
मुझे है बनाया
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कैसी महान योजना!
कैसा अनोखा प्यार!
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तेरी ज्योति मैंने जो पाई है,
इसलिए मैं तेरे संग चलूँगा
ज्योति मुझे तू ने ठहरायी है
जहाँ भी हूँ मैं तो चमकूँगा,
जीऊँगा यीशु .....