इब्तिदा में कुछ ना था
उसे सब कुछ ही बनाया:
खुदा ने लेके माटी को
उससे आदम को बनाया
उसमे जो डाली जान
मिली उसको पहचान
बनाया आपने जैसा
बन गया वो इंसान
वो खली बरतन था उसमे
अपना रूह बसाया
खुदा ने लेके माटी को
उससे आदम को बनाया
खुदावंद रोज़ मिलता था
उसे बाग ए अदन में
आदम भी चलता था
हरदम उसके वचन में
खुदा ने देख के तन्हा उसको
हवा को बनाया
खुदा ने लेके माटी को
उससे आदम को बनाया
शैतान की बातों में आकर
हवा ने फल जो लिया था
उसे भी खाया था वो फल और
आदम को दिया था
मोहब्बत को खुदा की उसने
पलभर में भुलाया
खुदा ने लेके माटी को
उससे आदम को बनाया
हुकुम जो तोड़ा था आदम ने
और फिर था पछताया
खुदा ने भेज के बेटा
अपना था राह बनाया:
येशु ने चढ़ के सुली पे
हमको खुदा से मिला
खुदा ने लेके माटी को
उससे आदम को बनाया
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