मेरे जीवन में तेरी येशु
ज़रुरत है -x2
तेरे बिना मैं कैसे जियूं
कैसे जियूं तेरे बिन ?
पाप पर मैं कैसे जीतूं
मुख देखे तेरे बिन
वचन पर भी मन न लागे
तू सिखये न तो
व्यर्थ जीवन मुरझा जाये
तू रहे न तो
भटकूं तो मैं कहाँ जाऊँ
घेरा तूने जो है
दर्शन माँगूं पल पल तेरे
नम्र इस दिल से
तेरे लहू के पाक बहाव में
मुझको शुद्ध कर दे
इस शरीर मंदिर में हरदम
तेरी प्रसन्नता रहे
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