मेरी रूह खुदा में मगन है
जान मेरी निजात से खुश है
मेरे सिर को उसने बुलंद किया
अब कौन मेरा है उसके सिवा
मेरी रूह…
देखो घमंड से, बच के रहना
मुंह से बड़ा, कोई बोल न कहना
वो है सब कुछ तोलने वाला
हर पर्दे को खोलने वाला
वो खुदा, खुदा-ए-रहम है
मेरी रूह…
हिम्मत मेरी, टूट गई थी
किस्मत मुझसे, रूठ गई थी
उसने अपने पास बुलाया
मुझको अपने साथ बैठाया
मेरी जान पे, उसका करम है
मेरी रूह…
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