मुझपे रहम कर ऐ खुदा,
है मेरी जान को तेरी पनाह।
मुझपे रहम…
मैं तेरे परों के साए में लूंगा पनाह,
जब तक न टल जाए हर एक आफ़त खुदा।
घेरा है मुझको मेरे दुश्मनों ने यहां,
वो मेरी खातिर फ़लक से मदद भेजेगा।
तेरा जलाल सारी ज़मीन पर हो।
तू जानता है खुदा, मेरे हून में कहां,
आतिश मिज़ाज और शेरों के हूं दरमियां।
तलवार जैसी ज़ुबान, दांत हैं बर्छियां,
तू अपनी रहमत और सच्चाई कर दे बयां।
तेरा जलाल सारी ज़मीन पर हो।
दिल अब है तेरा, तेरे गीत मैं गाऊंगा,
अब सारी दुनिया को ये बात बतलाऊंगा।
तारीफ़ तेरी करता रहूं मैं सदा,
रहमत और सच्चाई तेरी बुलंद ऐ खुदा।
तेरा जलाल सारी ज़मीन पर हो।
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