प्रभु परमेश्वेर तू कितना भला है
तेरी भलाई सदा की है
मेरा दिल तुझे धन्यवाद देता
मेरा प्राण तुझे स्तुति देता
कठिन समय में, तू मज़बूत गढ़ है
अँधेरी राह में, तू उजियाला है
मेरी दोहाई तू सुनता
मेरा प्रभु कभी नहीं सोता
मेरा प्राण तुझे स्तुति देता
तू कहता है नहीं छोडूंगा
तू कहता है नहीं ठुकराऊंगा
तेरा हाथ मेरी अगुवाई करता
तेरा सामर्थ मुझे बल देता
मेरा प्राण तुझे स्तुति देता
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