तूने इस दिल को तेरा मंदिर बनाया
कुछ काम का नहीं था मैं काबिल बनाया
साये में मैं तेरे चलता प्रभु
पीछे न देखु में तेरी आत्मा से बढूं
राहत से में भरता हूँ
तेरा शुक्र अदा करूँ
चाहत सिर्फ तेरी रख्खुं
तेरा शुक्र अदा करूँ
आसमां के बादशाह
पृथ्वी पर आया तू
न कोई पाप किया
पर बलिदान दिया तू
तुझसे पायी शिफा ....
उसको मेहसूस करूँ ....
(x2)
हर पल उस क्षण को याद करूँ
तेरा शुक्र अदा करूँ
सामर्थ से तेरी चलूँ
तेरा शुक्र अदा करूँ
तु ही मेरी आशा है
और तू ही मेरी मंज़िल है
तू ही मुझको उठाता
तू ही सहारा भी देता
तू ही मेरी गीत है
और जीने की भी रीत है
अनंत जीवन तू ही देता
तू ही मुझको बढ़ाता