सिर्फ मांगने नहीं ,
सिर्फ लेने ही नहीं,
हम यहाँ पर आये है।
तेरे हाथो को नहीं
तेरे चहरे को ही
हम निहारने आये है
x2
धन्यवाद की भेट चढाने ,
स्तुति के गीतों को गाने
उपकारों को याद हम करने
चरणों में तेरे हम आये
x2
तेरी कुव्वत और जलाल से भर से हमे
यही दुआ हम लाये है
तेरी हुजूरी की ही जरुरत है हमें
और कुछ नहीं हम चाहते है
x2
Click a stanza to preview here.