टूटा हुआ मन मैं लाता हूँ
खुद को मैं नम्र करता हूँ
तेरी करीबी का स्वाद जो मैंने चखा
अब और कुछ नहीं हूँ मैं चाहता
अब और कुछ नहीं मैं चाहता
एक वर मैंने यीशु से माँगा है, उसी की यत्न में लगा हुआ हूँ
जीवन भर तेरे भवन में, तेरी सुन्दरता निहारूँ
तेरे ही जैसा मैं बनता जाऊँ (2)
चरणों में तेरे मैं आता हूँ, वचनों को तेरे मैं सुनता हूँ
उत्तम भाग मुझे है मिला, जिसे कोई छीन न सकें
यीशु के प्यार में, मैं खो जाऊँ (2)
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