उस खुदा-ए-पाक के साए में है, कितना सुकून।
वो मेरा घर है, पनाह मेरी, मैं यह सबसे कहूँ।
उसपे ही तू रख उम्मीद और, उसपे ही कर ले यकीन।
जाल में सय्याद के तुझको छुड़ा लेगा वही।
वो तुझे अपने परों से ढांक लेगा प्यार से,
उसकी सच्चाई है तेरी ढाल, अब डरता है क्यों?
चाहे दिन के तीर हों या रात की हो बात,
तुझको छू भी न सकेंगे, चाहे जो हालात।
इस तरफ कितने गिरेंगे, उस तरफ भी बेशुमार,
पर तेरे नज़दीक भी ना आ सकेगी मौत यूँ।
तूने हक तआला को माना, इस लिए ये बात है,
हर मुसीबत में या आफ़त में वो तेरे साथ है।
शेर को भी रौंद कर तू यूँ निकलता जाएगा,
वो तुझे बख्शेगा इज़्ज़त, उम्र भर देगा सुकून।