ऐ कलीसिया, ऐ कलीसिया
हम तुझे जगाएंगे
सीचेंगे नये जीवन से
सर सब्ज बनाएंगे

पैदा हुए पले हैं, तेरी पनाह में
सीखा है हमने चलना, तेरी ही राह में
अब फैसला किया है, हमने ये आख़िरी
जो किये हैं हमने वादे, उनको निभाएँगे (x2)

ऐ कलीसिया .......

भटके हुए थे अब तक, जीवन की राहों में
बिन बादवान किश्ती, जैसे बहाव में
अब मिल गया है माँझी, फिर से बादवान
मझधार से निकलकर, जीवन में आये हैं (x2)

ऐ कलीसिया .......

माना है हमने तुझको दुल्हन मसीह की
कहलाई अब्द से तू वन्दन मसीह की
करके निसार तुझपे, जीवन की हर बहार
सोलह श्रृंगार से हम, तुझको सजाएंगे (x2)

ऐ कलीसिया, ऐ कलीसिया
हम तुझे जगाएंगे
सीचेंगे नये जीवन से
सर सब्ज बनाएंगे

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