चले आओ, थके लोगों – 2.
मैं ही येशु, जो विश्राम दू
ये बोझ जरा, मुझे दे दो
सलीब पर सब उठा लूगा

क्या बेकार हो, अकेले पड़े
निराशा ही है, सहारा नहीं
ना घरबार है, पड़ोसी नहीं
मददगार का, निराशा ही नहीं

क्या दिल टूटा, हताश्श पड़े
ना कल का पत, ठिकाना कहा,
क्या आसू कभी, ना रुकते यहा,
दुखों की घड़ी, ना कटती यहा

डरो ना उठो, भरोसा रखो
जा दे तुम्हें, छुड़ाया मैंने
हमेशा रहो, मेरे घर में
पिता नाम ले, बुलाता तुम्हें

www.christsquare.com