दयासागर हे तु इश्वर अनुगह करयह समारोह को तु धन्य करगलील के काना जौसीतयारी हे यहाँ भीपानी दाखरस कर दीरंग भर त यहाँ पर भी
जाचंगा किया है, धन्य राजा