इम्मानुएल के लहू से, एक सोता भरा है,
जो पापी उसमें लेवे स्नान, रंग पाप का छूटता है।
वो डाकू उसे क्रूस पर देख, पाप मोचन पाया,
तब हम वैसे पापी उसमें, पाप अपना धोवें सब।
विश्वास से जब मैं देखता हूँ, हमें दोषी रुधिर को,
मैं तेरी दया का बखान, नित करूं मरने लोन।
अरे मेमने तेरे रक्त का गुण, कभी ना मिटेगा,
और तेरी मंडली का बयान, सदा ही रहेगा।
और जब ये लड़खड़ाती जिभ, कब्र में चुप रहे,
तब तेरी स्तुति करूंगा, और मीठे रंगों से।