हम सब की ख़ातीर माँ को मसीह ने,
सदमों से दो चार किया
सोचो ज़रा की उसने हमसे,
क्यों इतना है प्यार किया
सोचो ज़रा की उसने हमसे,
क्यों इतना है प्यार किया……

सलीब उठाये गिरता सम्भलता
पाक मसीह जाता है
हम सब के पापों का बोझ उठाये
कोह-ए-कलवारी को जाता है
कोह-ए-कलवारी को जाता है
मौत से हमको बचाने की ख़तीर
बाप ने बेटा तैयार किया
सोचो ज़रा की उसने हमसे,
क्यों इतना है प्यार किया….

कोडों से ज़ख्मी है सारा बदन,
तमाचे भी मारे ज़ालिमों ने
मुह पर भी थूका, ताने भी दिए,
फतवा लगाया आलिमों ने
फतवा लगाया आलिमों ने
येशू बादशाह है ये लिखा और
कांटों का ताज तैयार किया
सोचो ज़रा की उसने हमसे,
क्यों इतना है प्यार किया…

सलीब पर पानी मांगा तो,
पीने को सिरका है मिला
भाले से पसली को छेद दिया,
खून और पानी बह निकला
खून और पानी बह निकला
डाकू ने जब इकरार किया था,
जन्नत का हकदार किया
सोचो ज़रा की उसने हमसे,
क्यों इतना है प्यार किया…

जब हैकल का पर्दा फटा
मसीह ने कहा तमाम हुआ
बेटे ने बाप की मर्जी को पूरा किया
अब्लीस नाकाम हुआ
हां अब्लीस नाकाम हुआ
कबरें खुलें और वो जी उठे हैं,
जिन्होन ने खुदा से प्यार किया
सोचो ज़रा की उसने हमसे,
क्यों इतना है प्यार किया

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