क्यूँ मैं डरूं, क्यूँ मैं डरूं ,
क्यूँ मैं डरूं, जब हैं तू मेरे अंदर...... (2)
जीवन का झरना, जगत की ज्योति...... (2)
यहूदा का सिंह हैं मेरे अंदर ......(2)

फिरोन की सेना चाहे मेरे पीछे हो
लाल समुंदर चाहे मेरे आगे हो ...... (2)
क्यूँ मैं डरूं, क्यूँ मैं डरूं,
क्यूँ मैं डरूं, जब हैं तू मेरे अंदर

लाल समुन्दर से रास्ता निकला ,
पानी के बीच में चलाया,
श्रापित बनकर श्राप से छुड़ाया,
मौत को उस क्रूस पर हराया ...... (2)

विजय हुआ विजय हुआ बिमारी के उपर
विजय हुआ विजय हुआ वो मौत के उपर
विजय हुआ विजय हुआ सैतान के ऊपर
विजय हुआ विजय हुआ हर श्राप के उपर
तो क्यूँ मैं डरूं

जो मेरे अंदर हैं वो उससे महान है जो संसार में हैं ...... (4)
जीवन का झरना जगत की ज्योति ...... (2)
यहूदा का सिंह हैं मेरे अंदर...... (2)

क्यूँ मैं डरूं, क्यूँ मैं डरूं,
क्यूँ मैं डरूं, जब हैं तू मेरे अंदर
जब हैं तू मेरे अंदर

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