मसीहा की मोहब्बत का
करें कैसे बयां कोई
किसी के वास्ते देता है
अपनी जा कहा कोई

भरे जो दिल के जख़्मों को
बने वो प्यार का मरहम…..2.
वो दरिया प्यार का तू है
मिले तुझसा कहा कोई

मेरी राहों के सब कांटे
उठा ले अपनी पलकों से……2.
नहीं इस तौर करता प्यार
कोई अब यहाँ कोई

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