चली रे चली मेरी, नाव चलीअपने पिया के गांव चलीयह संसार, घर नहीं मेराजाना है मुझको पिया नगरी
धूप में बैठी, झुलस गई हूँघर में सजन के, छांव घनी
दूर पहाड़ से, शब्द सुनूं मैंदेर ना कर अब आ सजनी...
भाव सागर से, पार लगावेपार लगावे, यीशु मसीह