प्रभु महान , विचारूं कार्य तेरे ,
कितने अद्भुत , जो तूने बनाये
देखूं तारे , सुनूं गर्जन भयंकर
सामर्थ तेरी , सारे भूमण्डल पर

प्रशंसा होव प्रभु यीशु की
कितना महान , कितना महान
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जब सोचता हूँ पिताः पुत्र अपना
मरने भेजा , है वर्णन से अपार
कि क्रूस पर मेरे पाप सब लेकर
रक्त बहाया कि मेरा हो उद्धार

प्रशंसा होव प्रभु यीशु की
कितना महान , कितना महान
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मसिह आवेगा , शब्द तुरही का होगा ,
मुझे लेगा जहाँ आनंद महान
झुकूंगा में साथ आदर भक्ति दीनता
और कहूंगा प्रभु कितना महान

प्रशंसा होव प्रभु यीशु की
कितना महान , कितना महान
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