तोरे सिवा जाऊं कहाँ
पाऊं तुझे जाऊं जहाँ

प्रभु मैं था एक अज्ञानी
अनुग्रह से ही तेरी महिमा जानी
भेड़ हूँ मैं, तू है गड़रिया
आत्मा से मुझको चरा

तोरे सिवा जाऊं कहाँ
पाऊं तुझे जाऊं जहाँ

काले समंदर से मैं घिरा था
आस न थी कोई, डूब रहा था
आके यीशु तूने बचाया
जीवन का मार्ग दिखाया

तोरे सिवा जाऊं कहाँ
पाऊं तुझे जाऊं जहाँ

प्रभु मैं था एक अभिमानी
करता था अपनी मनमानी
पत्थर सा दिल पिघलाया
सच्चा प्रेम करना सिखाया

तोरे सिवा जाऊं कहाँ
पाऊं तुझे जाऊं जहाँ

मोरे जीवन के तुम स्वामी
तुमको अर्पण प्राण आत्मा भी
तोरे जैसा कौन है प्रेमी
ना मिलेगा तुम सा कोई

तोरे सिवा जाऊं कहाँ
पाऊं तुझे जाऊं जहाँ

ना मिलेगा तू जैसे कोई
सारे मिलकर जय जय गायें
तेरी आगे शीश झुकायें
सर्वशक्तिमान है तू
ना कोई तुझसा प्रभु

तोरे सिवा जाऊं कहाँ
पाऊं तुझे जाऊं जहाँ

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