यीशु ने खून बुलाया था
पापोन से मुझे बचाया था
ज़ख्मों को मेरे अपनाया था
शैतान को उसने हरा दिया था
कलवारी का वो दर्द का रास्ता
कांधे पे था क्रुस, लहू था बेहटा
चुप था येशु, सब कुछ वो सहता
चलता गया वो, कुछ भी ना कहता
कीलों से छेड़ा, उसके हाथों को
कांटों का ताज पहनाया था उसको
दर्द में भी वो सबको था चाहता
प्रेम में वो हर ज़ख्म को सहता